छोटी कंपनियों के शेयर्स में ज्यादा निवेश से ज्यादा बेहतर होगा, बड़ी कंपनियों में कम निवेश करना.

शेयर बाजार में निवेश करने से पहले जानें फायदे और नुकसान

शेयर बाजार के बारे में भविष्यवाणी नहीं की जा सकती है. यह आंकलन से परे है. शेयर बाजार को समझना उन निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण है, जो स्टॉक खरीदना और बेचना चाहते हैं. इसी तरह, यदि आप शेयर बाजार में निवेश करते हैं तो आप अधिक पैसा कमा सकते हैं. शर्त यही है कि आपको जोखिम लेने के लिए हमेशा तैयार रहना होगा. सही समय पर शेयरों में निवेश और बिक्री से स्टॉक मार्केट से लाभ कमाया जा सकता है.

हैदराबाद : शेयर बाजार अप्रत्याशित है. इसमें हम बार-बार शॉर्ट टर्म उतार-चढ़ाव देख सकते हैं. शेयरों में निवेश करने के लिए हमें स्टॉक मार्केट को समझना चाहिए और उतार-चढ़ाव का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए. निवेशक के तौर पर हमारे लिए शेयर बाजार से जुड़ी बारीकियों को जानना जरूरी है. जब शेयर बाजार में पैसा लगाने के बारे में तब सोचते हैं, जब सूचकांक में तेजी आती है. हमें इसी तरह रेग्रेशन से डील करना पड़ती है, तब जाकर हम इन्वेस्टमेंट से मुनाफा कमाते हैं.

जब आप निवेश करने का फैसला करते हैं, तो यह गांठ बांध लें कि शेयर मार्केट में प्रति वर्ष 10-20 प्रतिशत करेक्शन की संभावना होती है. अगर आपका माइंड मेकअप है तो फिर कोई परेशानी नहीं होगी. अपने निवेश के कीमत पर नजर बनाए रखें. सुनिश्चित करें कि निवेश में असमानता 80 प्रतिशत से अधिक न हो. अगर ऐसा होता है तो बची हुई राशि को डेट फंड में डायवर्सिफाई करें. हमेशा निवेश के मूल्य को इस स्टैंडर्ड एस्टिमेट के साथ जोड़ें. यह आपको अस्थायी उतार-चढ़ाव का कोर्डनेट करने की अनुमति देता है. यह हिसाब-किताब नुकसान को सहन करने की आपकी क्षमता पर आधारित होना चाहिए.

पिछले दो वर्षों के दौरान शेयर बाजार में काफी तेजी आई है. इस बैकग्राउंड में आपके इक्विटी निवेश का मूल्य आपके पोर्टफोलियो में 5-10 प्रतिशत अधिक रहने की संभावना है. बाजारों में अभी अनिश्चितता का माहौल है. इसे ध्यान में रखते हुए, अपने निवेश को समायोजित करने का यह एक अच्छा समय है. आपको उन कंपनियों में निवेश करना चाहिए जो अच्छा परफॉर्म कर रही हैं . इस तरह इक्विटी इन्वेस्टमेंट को अपने मानक तक लाने का प्रयास करना चाहिए.

जैसी उम्मीद की जा रही है, आने वाले वर्ष में इक्विटी बाजारों के परफॉर्मेंस में सुधार होगा, इस हिसाब से इक्विटी निवेश पॉजिटिव हैं. य़ानी इस समय आपको निवेश करते रहने की जरूरत है. अगर शेयर बाजार का प्रदर्शन अच्छा नहीं है और अगर खबर आती है कि बाजार में गिरावट होगी तो घबराएं नहीं. यदि बाजार सूचकांक में 10 प्रतिशत की गिरावट आती है, तो निवेश को लोन से इक्विटी में लाना चाहिए. चूंकि शेयर मार्केट में वृद्धि होने पर इक्विटी रेश्यो अधिक होता है, इसलिए निवेश को 80 प्रतिशत तक सीमित करने के लिए कदम उठाए जाने चाहिए.

फंड्स इंडिया के रिसर्च हेड अरुण कुमार का कहना है कि शॉर्ट टर्म में इक्विटी मार्केट की परफॉर्मेंस का आंकलन करना कठिन है, इसलिए हर निवेश को अपने लक्ष्य से जोड़ा जाना चाहिए. एक बार सही प्लानिंग करने के बाद ही निवेश करना चाहिए. अरुण कुमार की सलाह है कि बाजार में निवेश करते समय डर, लालच और चिंता जैसी भावनाओं को नियंत्रित करना चाहिए और लगातार निर्णय लेना चाहिए.

सरकारी कंपनियों के शेयर में निवेश भी है फायदे का सौदा, जानिए कैसे होगा आपको लाभ

चुनावों से पहले अक्सर सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को रिफार्म की उम्मीद दिखती है। इस उम्मीद के सहारे वे अच्छा प्रदर्शन करते हैं। ऐसे में उम्मीद की जा सकती है कि सार्वजनिक उपक्रम अगले दो वर्षों में अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं।

नई दिल्ली, जेएनएन: सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां यानी पीएसयू पूंजी बाजार का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ये व्यापक स्तर पर निवेश के अवसर पेश करने वाले विभिन्न क्षेत्रों में मौजूद होती हैं। पीएसयू का अच्छा खासा मूल्यांकन किया गया है और ये बेहतर मार्जिन आफ सेफ्टी प्रदान करती हैं। इसके अलावा उतार-चढ़ाव वाले माहौल में ज्यादा लाभांश देने वाली कंपनियों की मांग अधिक होती है। इससे पूंजी में वृद्धि होती है।

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इस समय जो निवेशक सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की संभावित विकास यात्रा में हिस्सा लेने के अवसरों की तलाश कर रहे हैं, वे ऐसी कंपनियों में निवेश कर सकते हैं।

हाल ही में आइसीआइसीआइ प्रूडेंशियल म्यूचुअल इक्विटी शेयर के फायदे फंड ने पीएसयू इक्विटी फंड शुरू किया है। इसका उद्देश्य सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों की इक्विटी व इक्विटी से संबंधित उपकरणों में निवेशकों को लंबे समय में पूंजी में मजबूती प्रदान करना है। यह योजना उन सेक्टर्स और स्टॉक्स में निवेश करती है जो एसएंडपी बीएसई पीएसयू इंडेक्स का हिस्सा हैं। आइसीआइसीआई प्रूडेंशियल के प्रोडक्ट डेवलपमेंट एंड स्ट्रेटेजी हेड चिंतन हरिया का कहना है कि पीएसयू कंपनियों में गैर-प्रमोटरों की तुलना में ज्यादा होल्डिंग सरकार के पास होती है। चूंकि ये गैर-सरकारी कंपनियां गैर-प्रमोटरों के स्वामित्व में होती हैं, इसलिए पीएसयू सुरक्षा का बेहतर मार्जिन प्रदान करता है।

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पीएसयू क्षेत्र का मूल्यांकन काफी आकर्षक

पीएसयू क्षेत्र में आकर्षक मूल्यांकन यानी वैल्यूएशन कुछ समय के लिए आकर्षक रहा है, जो यह दर्शाता है कि कंपनियों के पास सुरक्षा का बेहतर मार्जिन है। पीएसयू कंपनियां अच्छे लाभांश का भुगतान भी करती हैं।हालांकि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक एक साइकिल चेंज के बीच में हैं, जिसमें इक्विटी पर रिटर्न अभी शुरू हुआ है। बेहतर एसेट क्वालिटी के कारण क्रेडिट लागत कम हो गई है।

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अगले दो वर्ष बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद

शेयर बाजार के आंकड़े बताते हैं कि चुनावों से पहले अक्सर सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को रिफार्म की उम्मीद दिखती है। इस उम्मीद के सहारे वे अच्छा प्रदर्शन करते हैं। चुनाव पूर्व अवधि को देखते हुए सार्वजनिक उपक्रम अगले दो वर्षों में अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं। इसके अलावा, पीएसयू शेयरों में निवेश करने से कई तरह के लाभ मिलते हैं। पीएसयू की उधार लेने की लागत कम है। यह बढ़ती ब्याज दर के मौजूदा परिदृश्य में फायदेमंद है। इतना ही नहीं पीएसयू शेयरों में प्रमोटरों द्वारा संचालित कंपनी की तुलना में निरंतरता के नजरिये से प्रमुख प्रबंधकीय कार्मिक जोखिम अपेक्षाकृत कम होता है।

Equity Market Investment : इक्विटी में निवेश पर चाहिए ज्यादा रिटर्न? अपनाएं ये 4 टिप्स

अगर आप शेयर मार्किट में निवेश करने की सोच रहे हैं तो अपनाए ये कुछ जरूरी टिप्स, जो आपके निवेश को तो सुरक्षित करेगा ही साथ ही आप को दिलायेगा ज्यादा रिटर्न

Equity Market Investment : इक्विटी में निवेश पर चाहिए ज्यादा रिटर्न? अपनाएं ये 4 टिप्स

छोटी कंपनियों के शेयर्स में ज्यादा निवेश से ज्यादा बेहतर होगा, बड़ी कंपनियों में कम निवेश करना.

Equity Investment : अगर आप शेयर मार्केट में निवेश करने के बारे में सोच रहे हैं तो हम आज आपको कुछ ऐसे जरूरी टिप्स बताने वाले हैं. इन्हें अपनाकर आप न सिर्फ अपने निवेश को सुरक्षित कर सकते हैं, बल्कि बेहतरीन रिटर्न भी हासिल कर पाएंगे. आम तौर पर इक्विटी शेयर के फायदे भारत में ज्यादातर लोग इक्विटी में निवेश करना पसंद करते हैं. क्योंकि इसमें कम निवेश पर भी बेहतरीन रिटर्न हासिल हो सकता है. हालांकि इसमें निवेश जोखिम बना रहता है. इसलिए इक्विटी में निवेश से पहले आपको इसके बारे में सभी जानकारी तो लेनी ही चाहिए, साथ ही आपको व्यवस्थित तरीके से निवेश करना चाहिए. ताकि आपके निवेश पर जोखिम कम से कम हो.

निवेशकों को इक्विटी में निवेश करते समय ये कुछ बातों का हमेशा ध्यान रखना चाहिए.

1. कभी भी इन्वेस्टमेंट टिप्स के पीछे न भागें

हमारे देश में शेयर मार्केट में इन्वेस्ट करने वाले 10 में से 9 व्यक्ति ऐसे हैं जिन्होंने किसी अन्य से मिली इन्वेस्टमेंट टिप्स को आधार बनाते हुए शेयर बाजार में निवेश शुरू किया है. ऐसे में सवाल उठता है कि शेयर मार्केट का जानकार या उसमें काम करने वाला व्यक्ति आप को ऐसी जानकारी या टिप्स क्यों देगा, जिससे उसकी जगह आप का फायदा होगा? उदाहरण के तौर पर हम देखेंगे कि कभी भी कोई सेफ (खाना बनाने वाला) अपनी रेसिपी का खुलासा नहीं करता है, तो फिर कोई आपको फायदा कराने वाली टिप्स की जानकारी क्यों देगा?. इसलिए किसी इन्वेस्टमेंट टिप्स के पीछे भागने से बेहतर होगा कि आप निवेश से पहले स्कीम को लेकर थोड़ा रिसर्च जरूर करें, ताकि आप की मेहनत की कमाई बेकार न हो जाए.

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2. फंडामेंटल एनालिसिस

जहां तक रिसर्च की बात है तो हर व्यक्ति को न तो रिसर्च की तकनीक का ज्ञान है और न ही उसमें इतनी समझ है कि वो खुद से इन्वेस्टमेंट से जुड़े टेक्निकल वर्ड को सही मायनों में समझ सके. हालांकि वो पढ़ जरूर सकता है. वैश्विक स्तर पर बात की जाए तो इन्वेस्टमेंट सेक्टर में हमेशा वॉरेन बफे और चार्ली मुंगेर की मिसाल दी जाती है, जिन्होंने निवेश से पहले अच्छी तरह से रिसर्च किया और प्लान तरीके से निवेश किया. अपनी इसी रिसर्च और प्लान निवेश के दम पर इंटरनेशनल मार्केट में दोनों ने अपनी खास पहचान बनाई है.

3. पोर्टफोलियो में लाएं डायवर्सिटी

क्या आप जाने हैं कि एक ही स्टॉक या सेक्टर में निवेश करना आप के लिए बड़ा जोखिमभरा साबित हो सकता है. इसलिए आप को निवेश करते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि आप अलग-अलग सेक्टर की कंपनियों में थोड़ा-थोड़ा निवेश करें, ताकि अगर एक सेक्टर या एक स्टॉक में कोई दिक्कत आती है तो आप की सारी रकम एक साथ न डूब जाएये. यही वजह है कि निवेशकों को अपने निवेश इक्विटी शेयर के फायदे पोर्टपोलियों में विविधता लाने की सलाह दी जाती है.

4. जोखिमों के बारे में रखें जानकारी

स्टॉक में निवेश करने वाले निवेशकों को ये पता होता है कि उसे कब शेयर खरीदना और बेचना है. आम तौर पर 20 से 30 फीसदी के लाभ पर शेयर होल्डर्स अपने शेयर को बेच देते हैं, लेकिन मंदी के दौर में निवेशकों को इसे लेकर बहुत ही सावधानी बरतने की जरूरत होती है. क्योंकि कई बार लोग सोचते हैं कि मंदी के समय में सस्ते शेयर लेकर इन्हें बाद में प्रॉफिट के साथ बेच देंगे. तो ये सोच कभी-कभी निवेशक के लिए बहुत ही नुकसानदायक साबित हो सकती है.

ELSS scheme benefits: जानिए इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम के 5 बड़े फायदे, कैसे बचाता है आपका 46 हजार से ज्यादा Tax?

ELSS scheme benefits: निवेश की शुरुआत करने लिए इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम शानदार स्कीम है. इस स्कीम का 80 फीसदी शेयर बाजार में और 20 फीसदी डेट मार्केट में निवेश किया जाता है. यह सालाना आधार पर 14-17 फीसदी का रिटर्न दे रहा है.

ELSS scheme benefits:: अगर आप फाइनेंशियल प्लानिंग कर इक्विटी शेयर के फायदे रहे हैं तो टैक्स प्लानिंग बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है. फाइनेंशियल एक्सपर्ट की सलाह होती है कि हर किसी को जल्द से जल्द निवेश शुरू कर देना चाहिए. टैक्स और फाइनेंशियल एक्सपर्ट गरिमा बाजपेयी (CA Garima Bajpai) ने कहा कि निवेश शुरू करने का सही समय आपका 20s होता है. शुरुआत में आपके ऊपर जिम्मेदारी कम होती है, जिसके कारण भविष्य के लिए ज्यादा से ज्यादा निवेश संभव हो पाता है. आप निवेश की दुनिया में नए होते हैं, ऐसे में सही स्कीम का चयन भी जरूरी होता है.

ELSS में निवेश पर टैक्स बेनिफिट भी मिलता है

चार्टर्ड अकाउंटेंट गरिमा ने कहा कि टैक्स और इन्वेस्टमेंट के लिहाज से ELSS यानी इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम्स शानदार विकल्प है. निवेश की शुरुआत ऐसी स्कीम्स से करनी चाहिए. इसमें टैक्स बेनिफिट के अलावा ग्रोथ का भी लाभ मिलता है. आइए इस स्कीम की 5 खास विशेषता के बारे में विस्तार से जानते हैं.

3 साल का लॉक-इन पीरियड

1>> ELSS इक्विटी आधारित म्यूचुअल फंड होता है जिसमें 80 फीसदी शेयर बाजार में और 20 फीसदी डेट में निवेश किया जाता है. इसमें मैक्सिमम निवेश की सीमा नहीं है, लेकिन मिनिमम निवेश 500 रुपए का होना चाहिए. इसके लिए लॉक-इन पीरियड सबसे कम 3 साल का होता है. इसमें निवेश करने पर सेक्शन 80सी के तहत टैक्स डिडक्शन का लाभ मिलता है, जिसकी लिमिट 1.5 लाख रुपए होती है.

14-17 फीसदी का सालाना रिटर्न

2>> लॉन्ग टर्म में यह स्कीम वेल्थ क्रिएट करने में सक्षम होती है. इसके प्रदर्शन पर गौर करें तो इसने 14-17 फीसदी का सालाना रिटर्न दिया है. टैक्स बेनिफिट के साथ-साथ इतना शानदार रिटर्न निवेशकों के लिए बहुत अच्छा है. अगर कोई इंडिविजुअल 30 फीसदी टैक्स ब्रैकेट में आता है तो वह इसमें निवेश कर सालाना आधार पर 46800 रुपए तक का टैक्स बचा सकता है. रिटर्न पर लगने वाले टैक्स की बात करें तो इस पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगता है. 1 लाख तक कैपिटल गेन टैक्स फ्री होता है. उसके बाद कैपिटल गेन पर 10 फीसदी की दर से टैक्स लगता है.

SIP और एकमुश्त निवेश का विकल्प

3>>निवेशकों के पास यह विकल्प होता है कि वे ELSS स्कीम में SIP करें या फिर एकमुश्त निवेश की भी सुविधा उपलब्ध है. SIP कम से कम 500 रुपए की हो सकती है. एकमुश्त निवेश की अपर लिमिट नहीं है.

डिविडेंड विकल्प भी मौजूद

4>>अगर कोई निवेशक डिविडेंड विकल्प का चयन करता है तो 3 साल के लॉक-इन पीरियड के दौरान भी उसे सालाना आधार पर डिविडेंड का लाभ मिलेगा.

अन्य स्कीम से मुकाबला

5>>एक्सपर्ट ने कहा कि सेक्शन 80सी के तहत निवेश के विकल्पों में पब्लिक प्रोविडेंट फंड और फिक्स्ड डिपॉजिट भी शामिल होता है. हालांकि, इन स्कीम्स पर रिटर्न फिक्स्ड होता है. ELSS पर मिलने वाला रिटर्न मार्केट के प्रदर्शन पर निर्भर करता है. यही वजह है कि मीडियम और लॉन्ग टर्म के लिहाज से वेल्थ बनाने में यह स्कीम ज्यादा प्रभावी है. बीते पांच सालों में इसने सालाना आधार पर 14-17 फीसदी का शानदार रिटर्न दिया है. चूंकि निवेश का यह विकल्प सीधा बाजार से संबंधित है. ऐसे में बाजार के उठापटक का आपके निवेश पर सीधा असर होता है. इससे बचने के लिए निवेशकों को लंबी अवधि के लिए निवेश की सलाह दी जाती है.

शेयरों में निवेश करना चाहते हैं तो ये 7 बातें आपको जरूर जाननी चाहिए

इक्विटी में निवेश किसी कारोबार के भविष्य में पैसा लगाना है.

Investment

शेयर में निवेश की एक सच्चाई है. बेशक इसमें बहुत पैसा बना सकते हैं. लेकिन, सनक में ट्रेडिंग से भला नहीं होता है. इससे कोई अमीर नहीं बना है. किस्मत बहुत मेहरबान हो तो नहीं कहा जा सकता है. लेकिन, जो तरकीब फायदा उठाने के लिए फिर काम न आए तो वह भी बेकार है.

शेयरों में निवेश की जुए से तुलना भी गलत है. यह पैसे को बढ़ाने का बिल्कुल वैध तरीका है. सवाल उठता है कि एक सामान्य निवेशक को शेयरों में निवेश करते हुए किन बातों को ध्यान में रखना चाहिए.

पहला, इक्विटी में निवेश किसी कारोबार के भविष्य में पैसा लगाना है. तमाम विशेषज्ञता के बावजूद कोई दावे से नहीं कह सकता कि कौन-सा कारोबार सफल होगा और किसे विफलता मिलेगी. इसी से आपके निवेश के लिए जोखिम बनता है. जब हम किसी अनजान जगह हाथ डालते हैं तो घबराहट लाजिमी है.

दूसरा, आप कई बार सुनते होंगे कि कैसे किसी ने कौड़ियों के भाव पर शेयर खरीदे और आज कैसे वह लाखों-करोड़ों की रकम पर बैठा है. यकीन मानिए यह सिक्के का सिर्फ एक पहलू है. आपको वह निवेशक ही बता पाएगा कि उसने क्या-क्या पापड़ बेले और उसके लिए एक मुकाम तक पहुंचने का सफर कितने रोड़ों से भरा रहा. एक सफल कहानी के पीछे सौ असलताएं होती हैं. इनकी कोई बात नहीं करता है.

तीसरा, शेयर को चुनने का कोई आसान तरीका नहीं है. इसमें कई बातें काम करती हैं. कोई नहीं कह सकता कि किस बात को ज्यादा तवज्जो मिल जाएगी और किसकी अनदेखी होगी. सालों के अनुभव के बाद लोग कुछ बातों के आधार पर तेजी और नरमी की संभावना जताने लगते हैं. लेकिन, वे भी हमेशा सही साबित नहीं होते हैं. इन एक्सपर्ट को भी पता होता है कि वे गलत हो सकते हैं. यही वजह है कि वे विनम्रता के साथ इस चीज को स्वीकारते हैं. इस तरह की सभी टिप्स की अनदेखी करें जो मुफ्त में दी जाती हैं.

चौथा, शेयर को खरीदने का फैसला कठिन होता है. चुनने के लिए शेयरों की भरमार है. कोई नहीं जानता कि किस शेयर को पंख लग जाएं. सभी ने अपने-अपने तरीके बना रखे हैं. स्टॉक ट्रेडर प्राइस टार्गेट रखते हैं. शॉर्ट-टर्म इंवेस्टर टाइम फ्रेम रखते हैं. वैल्यू इंवेस्टर सेफ्टी का मार्जिन रखते हैं. लिस्ट लंबी है. कुल मिलाकर खरीदारी अनुशासन के अधीन है. एक निवेशक को पता होना चाहिए कि उसने कोई शेयर क्यों लिया है.

पांचवां, सूचनाओं तक पहुंच की कमी के कारण सामान्य निवेशकों को नुकसान उठाना पड़ता है. ब्रोकिंग हाउस डेटाबेस खरीदते हैं. रिसर्च करते हैं. अपने यहां कुशल लोगों को नौकरी पर रखते हैं. शेयरों को ट्रैक करते हैं और रिपोर्ट बेचते हैं. सामान्य निवेशकों को सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी पर निर्भर रहना पड़ता है. ऑनलाइन चैट और टीवी के कार्यक्रमों को रिसर्च समझने की भूल नहीं करनी चाहिए.

छठा, एक दांव लगाकर पैसा नहीं बनाया जा सकता है. हर कोई बिल गेट्स या जेफ बेजोस नहीं बना सकता है. हममें से ज्यादातर के पास एक ही बिजनेस में अपना सब कुछ लगा देने की हिम्मत नहीं होती है. हम सभी कई शेयरों में निवेश करते हैं. यही करना भी चाहिए. किस तरह का पोर्टफोलियो बन रहा है, इस पर फोकस बनाकर रखना चाहिए.

सातवां, जब आपको भविष्य का पता नहीं होता है. आप शेयर को पूरी जानकारी के अभाव में खरीते हैं. फिर वह अच्छा परफॉर्म नहीं करता है. तो, अपनी गलती स्वीकार करनी चाहिए. सही शेयरों को चुनने से ही पैसा नहीं बनाया जाता है. आपको यह भी पता होना चाहिए कि किस निवेश रणनीति ने आपको नुकसान कराया. कई लोग खराब शेयर को उसके बढ़ने की उम्मीद लगाकर रोके रखते हैं. यही नहीं, और पैसा भी लगा देते हैं. जो लोग अपनी गलती नहीं मानते हैं, उन्हें शेयरों में निवेश में भारी नुकसान उठाना पड़ता है.

शेयरों का डायवर्सिफाइड पोर्टफोलियो अच्छा है. इनमें वे शेयर होने चाहिए जिनमें भविष्य में बढ़ने की क्षमता दिखती हो. ऐसा नहीं होने पर इन शेयरों को बदल देना चाहिए. तभी आप बढ़िया रिटर्न की अपेक्षा कर सकते हैं.

इंडेक्स ईटीएफ में निवेश अच्छा है और सस्ता भी. दुनिया में आज सबसे अमीर लोग शेयर निवेशक हैं. आप भी पीछे मत रह जाइए.

(लेखिका सेंटर फॉर इंवेस्टमेंट एजुकेशन एंड लर्निंग की चेयरपर्सन हैं.)

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